पहाड़ के पार आज माटी गाँव से जाना है। कल से हिम आएगी। पहाड़ की ऊपरी जगह बंद होगी। नील और अमन घर के बाहर खड़े हैं। उनके पास पानी और खाना है। अमन के हाथ में एक कपड़ा है। उसमें थोड़ा खाना बंधा है। नील कहता है, “अमन, आज हमें पार जाना है।” अमन कहता है, “क्यों जाना है?” “उधर काम है। कल यह जगह बंद होगी।” “आज ही जाना जरूरी है?” “आज नहीं गए, तो कई दिन रुकेंगे।” अमन घर को देखता है। “माँ अकेली है।” नील कहता है, “माँ ने कहा है, जाओ।” दोनों घर से निकलते हैं। पहले वे नीचे की मिट्टी वाली जगह आते हैं। वहाँ पानी बह रहा है। पानी कम है, पर जमीन गीली है। अमन रुकता है। “नील, यहाँ से कैसे जाएँ?” “मेरे साथ आओ। पानी के पास मत जाओ।” नील ऊपर की मिट्टी देखता है। वह एक सूखी जगह चुनता है। अमन उसके पीछे चलता है। उसका एक कपड़ा पानी में चला जाता है। अमन कहता है, “मेरा कपड़ा चला गया।” “उसे छोड़ दो। खाना बचा है?” “हाँ, खाना बचा है।” “तो आगे चलो।” कुछ समय बाद वे काले मोड़ पर पहुँचते हैं। वहाँ ऊपर जाने की जगह बहुत कम है। एक ओर पहाड़ है। दूसरी ओर नीचे की जगह है। ऊपर से पानी आ रहा है। अमन कहता है, “नील, मैं आगे नहीं जा सकता।” नील पीछे आता है। “डरो मत। मेरा हाथ लो।” अमन उसका हाथ लेता है। दोनों धीरे धीरे ऊपर जाते हैं। अमन का पैर नीचे जाता है। नील उसे ऊपर खींचता है। अमन कहता है, “मुझे वापस जाना है।” नील कहता है, “वापस जाओगे, तो हिम में फँसोगे।” “तुम मेरे साथ रहोगे?” “हाँ, मैं साथ रहूँगा।” वे काले मोड़ से ऊपर निकलते हैं। अब ठंड अधिक है। अमन का कपड़ा सूखा नहीं है। नील अपना कपड़ा उसके ऊपर रखता है। अमन कहता है, “अब तुम्हें ठंड लगेगी।” “मुझे थोड़ी ठंड है। तुम चलते रहो।” ऊपर सफेद जगह शुरू होती है। वहाँ पहले की हिम है। नई हिम भी गिर रही है। आगे एक ऊँचा पतला भाग है। उसके बाद पार का गाँव है। अमन पूछता है, “वहाँ पहुँचकर क्या होगा?” “वहाँ रात होगी। वहाँ आग और खाना मिलेगा।” “अगर हम न पहुँचें?” “तो यहीं रुकना होगा। यहाँ रुकना ठीक नहीं।” दोनों उस ऊँचे भाग पर जाते हैं। हिम उनके कपड़ों पर जमती है। अमन बार बार रुकता है। नील उसका हाथ नहीं छोड़ता। अमन कहता है, “नील, अब मेरे हाथ में जोर नहीं है।” नील कहता है, “मेरा हाथ लो। एक कदम और।” “एक कदम और?” “हाँ, फिर एक कदम और।” वे आगे जाते हैं। अमन अब नील का हाथ खींचता है। नीचे का गाँव दिखाई नहीं देता। ऊपर की जगह भी साफ नहीं दिखती। अमन कहता है, “नील, तुम आगे जाओ।” “नहीं। हम साथ जाएँगे।” अमन चुप रहता है। फिर वह अपना खाना खोलता है। “आधा तुम लो।” नील कहता है, “तुम खाओ।” “तुम साथ रहे हो। आधा तुम लो।” नील आधा खाना लेता है। दोनों वहीं खाते हैं। फिर वे ऊपर देखते हैं। पार का गाँव अब पास है। नील कहता है, “अब नीचे जाना है।” अमन कहता है, “मैं पहले जाऊँगा।” नील कहता है, “नहीं, पहले मैं।” अमन उसका हाथ पकड़ता है। “अब मैं साथ रहूँगा।” दोनों नीचे जाते हैं। गाँव की एक रोशनी दिखती है। पीछे पहाड़ पर हिम गिरती रहती है। अमन रुकता नहीं है।