रवि की घड़ी आज नए नगर की बड़ी घड़ी चलनी है। रवि घड़ी ठीक करने वाली दुकान में रहता है। उसकी दुकान आज नौ बजे खुलनी है। सीमा आठ बजे दुकान के सामने आती है। उसके हाथ में एक घड़ी है। सीमा दरवाजे को देखती है। दुकान बंद है। सीमा कहती है, “रवि, आज फिर देर है?” अंदर से रवि कहता है, “नहीं, अभी समय है।” सीमा अपनी घड़ी देखती है। “समय नौ बजे का है।” रवि कहता है, “मेरी घड़ी में आठ बजे हैं।” “तुम्हारी घड़ी बंद है,” सीमा कहती है। “इसीलिए तो मैं इसे ठीक कर रहा हूँ।” सीमा बाहर खड़ी रहती है। रवि अंदर कुछ करता है। फिर दुकान खुलती है। रवि हाथ में तीन घड़ियाँ लेकर बाहर आता है। सीमा पूछती है, “अब समय क्या है?” रवि कहता है, “अब दस बजे हैं।” सीमा फिर घड़ी देखती है। “अभी नौ बजे हैं।” रवि तीनों घड़ियाँ देखता है। “इनमें एक सही है।” “कौन सी?” “जो दस बजे दिखा रही है।” सीमा चुप रहती है। वह अपनी घड़ी रवि को देती है। वह कहती है, “इसे आज ठीक कर दो।” रवि घड़ी लेकर अंदर जाता है। सीमा पूछती है, “बड़ी घड़ी कौन ठीक करेगा?” रवि अंदर से कहता है, “मैं ही करूँगा।” “बड़ी घड़ी नौ बजे चलनी है।” “वह चल जाएगी।” “कब?” “जब मैं पहुँच जाऊँगा।” सीमा दुकान के अंदर आती है। मेज पर बहुत घड़ियाँ हैं। कुछ घड़ियाँ आठ बजे दिखाती हैं। कुछ नौ बजे दिखाती हैं। एक घड़ी बारह बजे दिखाती है। सीमा कहती है, “यहाँ समय कहाँ है?” रवि कहता है, “समय सब जगह है।” “लेकिन सही समय कहाँ है?” रवि अपनी जेब देखता है। “वह घर पर रह गया।” सीमा उसे देखती है। “तुम भी घर पर रह जाते।” रवि कुछ नहीं कहता। वह घड़ी खोलता है। सीमा पूछती है, “अब यह ठीक है?” रवि कहता है, “अब यह चल रही है।” घड़ी चलती है और फिर रुक जाती है। सीमा कहती है, “यह फिर रुक गई।” रवि कहता है, “यह भी देर से चलती है।” “घड़ी देर से कैसे चलती है?” “यह रवि की घड़ी है।” सीमा अपनी घड़ी वापस लेती है। “मुझे पैसे देने हैं?” “नहीं, आज काम पूरा नहीं हुआ।” “आज बड़ी घड़ी भी चलनी है।” रवि बाहर देखता है। सड़क पर लोग खड़े हैं। बड़ी घड़ी बंद है। सीमा कहती है, “अब दस बजे हैं।” रवि जल्दी से अपनी चीजें उठाता है। “मैं अभी जाता हूँ।” सीमा पूछती है, “कहाँ?” “बड़ी घड़ी के पास।” “तुम फिर देर करोगे।” रवि रुकता है। “नहीं, इस बार मैं समय पर जाऊँगा।” वह बाहर जाता है। फिर वापस आता है। सीमा पूछती है, “अब क्या हुआ?” रवि कहता है, “मेरी घड़ी यहाँ रह गई।” सीमा उसे घड़ी देती है। “अब जाओ।” रवि सड़क की ओर जाता है। पाँच कदम बाद रुकता है। वह वापस आकर पूछता है, “समय क्या है?” सीमा कहती है, “ग्यारह बजे हैं।” रवि कहता है, “तो मैं समय पर हूँ।” सीमा बड़ी घड़ी की ओर देखती है। बड़ी घड़ी चल पड़ती है। उसमें नौ बजे हैं।