दू कप चाय बरगद चौकक छोट चायघरमे रमेश बैसल छथि। रमेश रोज एतय चाय पीबय छथि। आजुक दिन अलग अछि। आजि रमेश पहिल बेर अपन मित्र सीताकेँ अनलनि। माला रोज हुनका लेल एक कप चाय बनबैत छथि। माला चायघर चलबैत छथि। माला पूछैत छथि, “रमेशजी, आज की देब?” रमेश कहैत छथि, “रोजवाला चाय दिअ।” माला फेर पूछैत छथि, “एक कप?” रमेश कहैत छथि, “एक कप।” सीता चुपचाप रमेशक बगलमे बैसैत छथि। ओ चायघर दिस देखैत छथि। सामने काठक मेज अछि। मेज पर चीनीक डब्बा अछि। सड़क पर लोक चलि रहल अछि। माला चाय बनबैत छथि। रमेश सीतासँ कहैत छथि, “ई हमर रोजक जगह अछि।” सीता कहैत छथि, “तूँ रोज एतय अबैत छँ?” “हँ, रोज अबैत छी।” “रोज एक कप चाय?” “हँ, रोज एक कप।” माला दू कप चाय अनैत छथि। ओ दुनू कप मेज पर रखैत छथि। रमेश कप दिस देखैत छथि। रमेश कहैत छथि, “माला, हम एक कप कहलहुँ।” माला कहैत छथि, “आज दू गोटे छी।” रमेश कहैत छथि, “सीता चाय नहि पीबैत छथि।” सीता तुरन्त कहैत छथि, “हम चाय पीबैत छी।” रमेश सीताक दिस देखैत छथि। “तूँ कहलहि नहि।” सीता कहैत छथि, “तूँ पूछलहि नहि।” माला कहैत छथि, “दू कप चाय अछि। एकटा अहाँक, एकटा सीताक।” रमेश अपन जेबी छूबैत छथि। जेबीमे दस रुपैयाक एकटा नोट अछि। ओ नोट बाहर निकालैत छथि। रमेश कहैत छथि, “माला, हमरा लग दस रुपैया अछि।” माला कहैत छथि, “एक कपक दस रुपैया अछि।” सीता अपन झोरा खोलैत छथि। झोरामे छोट पर्स अछि। सीता कहैत छथि, “दोसर कपक पैसा हम देब।” रमेश कहैत छथि, “नहि, आज हम देब।” सीता कहैत छथि, “तखन काल्हि हम देब।” रमेश फेर कहैत छथि, “नहि, आज हम देब।” माला दुनू दिस देखैत छथि। “दस रुपैया अहाँ दिअ। दस रुपैया सीता दिअ।” सीता एकटा दस रुपैयाक नोट निकालैत छथि। रमेश अपन नोट मेज पर रखैत छथि। सीता अपन नोटक लग रखैत छथि। माला नोट उठबैत छथि। ओ दू कपक पैसा गिनैत छथि। फेर चाय दिस बढ़ैत छथि। रमेश कप उठबैत छथि। सीता सेहो कप उठबैत छथि। सीता चाय पीबैत छथि। “चाय गरम अछि।” रमेश कहैत छथि, “एतुक चाय रोज गरम रहैत अछि।” माला हँसैत नहि छथि। ओ खाली कप देखैत छथि। “रमेश, काल्हि एक कप?” माला पूछैत छथि। रमेश सीताक दिस देखैत छथि। सीता कप मे बचल चाय देखैत छथि। रमेश कहैत छथि, “काल्हि दू कप।”