तीन शादी के पत्र दिल्ली के एक घर में आज सब बैठे हैं। आज अमन और रीमा की शादी का जवाब देना है। राघव के हाथ में एक पत्र है। पत्र के साथ शादी की बात भी है। नीलम ने पत्र देखा। “यह किसका पत्र है?” “अमन का है,” राघव ने कहा। “आज जवाब देना है।” तारा ने मेज पर दूसरा पत्र रखा। “यह भी अमन का है।” चिंटू ने तीसरा पत्र उठाया। “यह भी अमन का है।” दादी ने तीनों पत्र अपने पास रखे। “तो तीन जवाब देने होंगे।” राघव ने कहा, “नहीं, शादी एक है।” “पत्र तीन हैं,” दादी ने कहा। “जवाब तीन होंगे।” नीलम ने पहला पत्र खोला। उसमें अमन और रीमा का नाम था। शादी का दिन था। जाने की बात थी। नीलम बोली, “हम जाएंगे। एक जवाब लिखो।” राघव ने कागज लिया। “हम शादी में आएंगे।” दादी ने कागज रोक लिया। “यह पहले पत्र का जवाब है।” “हाँ,” राघव ने कहा। “दूसरे पत्र का जवाब कहाँ है?” तारा ने दूसरा पत्र खोला। “इसमें भी वही नाम है। वही दिन है।” दादी ने कहा, “तो दूसरा जवाब लिखो।” राघव ने दूसरा कागज लिया। “हम शादी में आएंगे।” नीलम ने पूछा, “पहले में भी यही है।” “वही बात है,” राघव ने कहा। दादी ने कहा, “बात वही है, पत्र अलग है।” चिंटू ने तीसरा पत्र खोला। उसमें भी वही नाम था। चिंटू बोला, “इसमें भी हम आएंगे।” दादी ने तुरंत कहा, “तीसरा जवाब लिखो।” राघव ने तीसरा कागज लिया। “हम शादी में आएंगे।” अब तीन कागज मेज पर थे। तीनों पर वही जवाब था। तारा ने कागज पढ़े। “तीनों जवाब एक जैसे हैं।” दादी ने कहा, “अच्छा है। तीनों सही हैं।” नीलम ने पूछा, “अब इन्हें कहाँ भेजें?” दादी ने पहला कागज पहले पत्र में रखा। “पहला जवाब पहले पत्र में।” उन्होंने दूसरा कागज दूसरे पत्र में रखा। “दूसरा जवाब दूसरे पत्र में।” उन्होंने तीसरा कागज तीसरे पत्र में रखा। “तीसरा जवाब तीसरे पत्र में।” राघव ने माथे पर हाथ रखा। “तीनों पत्र किसे भेजेंगे?” “अमन को,” दादी ने कहा। “एक घर में तीन पत्र जाएंगे?” तारा ने पूछा। “हाँ,” दादी ने कहा। “अमन को पता चलेगा कि हम तीन बार आएंगे।” नीलम ने हँसने की कोशिश की। चिंटू ने तीनों पत्र उठाए। “मैं तीनों अभी डाल आता हूँ,” चिंटू बोला। राघव ने पूछा, “कहाँ?” चिंटू ने दरवाजे की तरफ देखा। “अमन के घर में।” दादी ने सिर हिलाया। “पहले पता तो पढ़ो।” तीनों पत्रों पर एक ही पता लिखा था। दादी ने तीनों पत्र चिंटू को दे दिए। चिंटू दरवाजे से बाहर गया और तीनों पत्र एक ही डिब्बे में डाल आया।