पहला टिकट सीमा आज रूप सिनेमा में काम शुरू करती है। यह उसकी पहली नौकरी और पहली शाम है। घर में पैसे कम हैं, इसलिए काम जरूरी है। वह टिकट वाली छोटी जगह पर बैठती है। सामने मैनेजर अरुण खड़ा है। अरुण कहता है, “पहले पैसे लो, फिर टिकट दो।” सीमा कहती है, “यह काम आसान लगता है।” “पहली फिल्म के बाद फिर कहना।” “आप हर नई लड़की से यही कहते हैं?” “नहीं, केवल तुमसे, क्योंकि तुमने कहा आसान है।” एक आदमी दो टिकट मांगता है। सीमा पैसे लेकर तीन टिकट दे देती है। अरुण कहता है, “दो पैसे, दो टिकट।” सीमा पूछती है, “अब क्या करूँ?” “एक टिकट वापस लो।” आदमी कहता है, “तीसरा दोस्त बाहर रह गया।” सीमा टिकट वापस लेती है। आदमी अंदर चला जाता है। सीमा कहती है, “पहली गलती हो गई।” अरुण कहता है, “हर फिल्म में पहली गलती होती है।” “कौन सी फिल्म में?” अरुण फिल्म का नाम और पूरा पहला भाग बताता है। सीमा हाथ उठाकर उसे रोकती है। “ठीक है, आपको सब याद है।” “हर फिल्म, हर गीत, हर अंतिम बात।” “फिर काम क्यों करते हैं?” “क्योंकि फिल्म देखकर घर नहीं चलता।” नील टिकट वाली जगह के सामने आता है। वह सीमा के स्कूल में पढ़ता है। सीमा जल्दी से टिकट नीचे रखती है। नील पूछता है, “तुम यहाँ क्या कर रही हो?” सीमा कहती है, “मैं यहाँ की मैनेजर हूँ।” अरुण पीछे से कहता है, “और मैं टिकट देता हूँ।” नील हँसता है। सीमा अरुण को देखती है। “आपको हर बात बोलनी होती है?” “केवल सही बात।” नील कहता है, “एक टिकट देना, मैनेजर जी।” सीमा पूछती है, “अकेले फिल्म देखने आए हो?” “हाँ, लेकिन अब अकेला नहीं हूँ।” “मैं काम पर हूँ।” “फिल्म के बाद दस मिनट मिल सकते हैं?” सीमा पैसे गिनती है। उसके हाथ से एक रुपया नीचे गिरता है। अरुण कहता है, “इस फिल्म में भी पहली गलती।” सीमा रुपया उठाती है। “एक टिकट, और पैसे पूरे हैं।” नील टिकट लेकर पूछता है, “दस मिनट?” सीमा अरुण की तरफ देखती है। अरुण कहता है, “अंतिम शो के बाद सफाई होगी।” सीमा कहती है, “सफाई में दस मिनट लगेंगे।” नील पूछता है, “फिर?” “फिर बाहर मिलना।” नील अंदर चला जाता है। सीमा अगला टिकट हाथ में लेती है। अरुण पूछता है, “यह कौन सी फिल्म है?” सीमा कहती है, “इसका अंत आपको भी पता नहीं।”