बाज़ार जयपुर में वह महिला एक छोटे बाजार में आती है। वह कुछ हफ्ते पहले शहर में आई है। उसकी छोटी रसोई घर में है। आज शाम घर में साथ खाना है। बाजार जल्दी बंद होता है। उसका बैग उसके हाथ में है। दूध उसके सामने है। वह दूध को देखती है, पर नाम नहीं जानती। वह उंगली से दूध की ओर देखती है। “कृपया, यह।” दूध वाला एक ब्रेड लेता है। वह ब्रेड उसके सामने रखता है। “यह नहीं।” दूध वाला कहता है, “ब्रेड है।” वह फिर उस ओर उंगली रखती है। “यह, कृपया।” वह एक सेब लेता है। वह सेब उसके हाथ में रखता है। “नहीं, यह नहीं।” वह फिर दूध की ओर देखती है। “यह नहीं।” दूध वाला एक कप उठाता है। वह कप देखता है और हंसता है। “कप है।” वह महिला अब कुछ नहीं कहती। वह एक हाथ से अपने जूते दिखाती है। दूध वाला जूते देखता है। “जूते नहीं।” वह आदमी शांत रहता है। वह दूध के पास जाता है। वह दूध उठाता है। वह धीरे कहता है, “दूध।” वह महिला उसकी ओर देखती है। वह धीरे कहती है, “दूत।” दूध वाला कहता है, “दूध।” वह महिला कहती है, “दूध।” वह महिला फिर कहती है, “दूध, कृपया।” दूध वाला दूध बैग में रखता है। वह पूछती है, “कितना?” वह कहता है, “एक रुपया।” वह एक रुपया रखती है। वह रुपया लेता है और एक दूध बैग में रखता है। वह कहता है, “यह भी, नहीं।” वह महिला कहती है, “धन्यवाद।” वह बैग लेती है और बाहर आती है। वह रास्ते में बैग देखती है। वह धीरे कहती है, “दूध।” वह घर के दरवाजे तक जाती है। वह दरवाजे पर फिर कहती है, “दूध।” पड़ोस की महिला सीढ़ी के ऊपर आती है।