तीन बातें रवि आज बस से अपने घर जा रहा है। उसकी बस सात बजे जाने वाली है। वह बस के पास छोटे कैफ़े में बैठता है। उसकी मेज के नीचे एक पत्र पड़ा है। उस पर हाथ से तीन बातें लिखी हैं। पहली बात है, “लाल कप के पीछे।” दूसरी है, “पीछे वाली मेज के नीचे।” तीसरी है, “सात बजे, उत्तर नगर की बस।” रवि पत्र लेकर खड़ा होता है। वह कैफ़े की महिला के पास जाता है। “यह पत्र किसका है?” रवि पूछता है। “मुझे नहीं पता,” महिला कहती है। “तुम्हें कहाँ मिला?” “मेरी मेज के नीचे,” रवि कहता है। “लाल कप कहाँ है?” महिला सामने की तरफ देखती है। “वह लाल कप है,” वह कहती है। रवि लाल कप के पास जाता है। कप के पीछे एक छोटा कागज है। उस पर लिखा है, “पीछे वाली मेज।” “वही बात फिर लिखी है,” रवि कहता है। “तो पीछे वाली मेज देखो,” महिला कहती है। रवि पीछे वाली मेज के नीचे देखता है। वहाँ एक लाल बैग रखा है। वह बैग उठाता है। “क्या यह बैग आपका है?” वह महिला से पूछता है। “नहीं,” महिला कहती है। “एक लड़की यहाँ बैठी थी।” “वह कहाँ गई?” रवि पूछता है। “बस की तरफ,” महिला कहती है। “उसने दूध बिना चाय ली थी।” “कौन सी बस?” रवि पूछता है। महिला पत्र की तीसरी बात पढ़ती है। “सात बजे, उत्तर नगर की बस,” वह कहती है। रवि समय देखता है। सात बजने में दो मिनट हैं। वह लाल बैग लेकर बाहर जाता है। दो बस खड़ी हैं। रवि पहले बस वाले से पूछता है, “उत्तर नगर?” “नहीं, दक्षिण नगर,” आदमी कहता है। रवि दूसरी बस के पास जाता है। “उत्तर नगर?” रवि पूछता है। “हाँ, जल्दी बैठो,” बस वाला कहता है। “एक लड़की का लाल बैग रह गया है,” रवि कहता है। बस के अंदर से एक युवा महिला बाहर आती है। “लाल बैग?” वह पूछती है। “वह मेरा है।” “आपका नाम क्या है?” रवि पूछता है। “मीरा,” वह कहती है। रवि बैग नहीं देता। “बैग में क्या है?” “दो कपड़े, एक किताब और घर की चाबी,” मीरा कहती है। “छोटे हिस्से में चार सौ रुपये हैं।” रवि बैग खोलकर देखता है। अंदर वही सब है। वह बैग मीरा को दे देता है। “यह पत्र भी आपका है?” रवि पूछता है। मीरा पत्र देखती है। “हाँ, मैं बातें भूल जाती हूँ। इसलिए लिखती हूँ।” “बैग मेज के नीचे क्यों रखा?” रवि पूछता है। “चाय के पैसे देने गई थी,” मीरा कहती है। “फिर बस देखी और चल दी।” बस वाला कहता है, “अब बस जा रही है।” मीरा बैग लेकर बस में चढ़ती है। वह दरवाजे से कहती है, “रवि, आपका नाम मैं अभी लिखती हूँ।”