हरी की चाय की दुकान बौर बाजार मा हरी की चाय की दुकान छ। आज रीना की फीस देणी छ। हरी सवेरे जल्दी दुकान खोलदा। चूल्हा जलदा। पानी गरम होण लागदा। कमला घर मा रीना कै साथ छ। गोपाल दुकान पर आंछ। हरी पूछदा, “गोपाल, आज क्या लौं?” गोपाल बोलदा, “एक चाय, कम चीनी।” हरी चाय बनांदा। गोपाल चाय पींदा। फेर गोपाल पूछदा, “कितणा पैसा?” “दस रुपया,” हरी बोलदा। गोपाल दस रुपया देंद। हरी पैसा डब्बे मा रखदा। जमुना आंछ। हरी बोलदा, “जमुना, तेरी चाय तयार छ।” जमुना हंसदी, “तू जाणद, हरी।” “हां, तू रोज एक चाय पींदी।” “आज चाय कम गरम रख।” “ठीक छ। आज कम गरम चाय।” हरी चाय देंद। जमुना पैसा देंद। हरी पैसा डब्बे मा रखदा। नरेश आंछ। हरी पूछदा, “नरेश, आज दाल-भात?” नरेश बोलदा, “हां, एक थाली। दही नि।” “दाल, भात, सब्जी। दही नि।” “ठीक छ।” नरेश बैठदा। हरी थाली लगांदा। नरेश खांदा। नरेश पैसा देंद। हरी पैसा डब्बे मा रखदा। तभी रीना बाजार मा आंछ। उसके हाथ मा स्कूल की पर्ची छ। रीना बोलदी, “बाबा, फीस आज देणी छ।” हरी बोलदा, “हां रीना, आज देणी छ।” हरी डब्बा खोलदा। डब्बे मा पैसा गिनदा। हरी बोलदा, “कम पैसा छ।” रीना चुप रैंदी। गोपाल बोलदा, “हरी, मेरी चाय का पैसा फेर ले।” हरी बोलदा, “नै, गोपाल। पैसा पूरा छ।” गोपाल बोलदा, “मेरे पास बीस रुपया और छ।” हरी गोपाल की तरफ देखदा। “तू बीस रुपया दे?” “हां, फीस आज देणी छ।” गोपाल बीस रुपया देंद। हरी पैसा डब्बे मा रखदा। जमुना बोलदी, “मेरी चाय का पैसा कल ल्यूं?” हरी बोलदा, “नै, जमुना। आज पैसा दे।” जमुना अपना थैला देखदी। “मेरा पैसा कम छ।” हरी बोलदा, “कितणा छ?” “पांच रुपया।” हरी कुछ देर चुप रैंदा। फेर बोलदा, “पांच रुपया दे।” जमुना पांच रुपया देंद। हरी रीना कै बोलदा, “चल, अब फीस देण जां।” रीना पर्ची पकड़दी। “दुकान बंद?” हरी चूल्हा देखदा। “नै, नरेश अभी बैठो छ।” नरेश थाली उठांदा। “हरी, दुकान खुली रख। मैं बरतन धो द्यूं।” हरी बोलदा, “ठीक छ।” रीना हरी कै साथ बाजार तैं बाहर जांदी। हरी डब्बा हाथ मा रखदा।