बाज़ार जयपुर में यह महिला तीन सप्ताह पहले आई है। उसकी छोटी रसोई है, और उसे बहुत कम शब्द आते हैं। आज शाम पड़ोसी खाने आएगा, और बाजार जल्द बंद होगा। महिला बाजार में दूध लेने आती है। उसके हाथ में छोटी थैली है। दूध की थैलियां दुकान के पास रखी हैं। दुकान वाला पैसे गिन रहा है। महिला दूध की थैली दिखाती है। वह कहती है, “यह, कृपया।” दुकान वाला रोटी उठाकर देता है। महिला रोटी देखती है। वह कहती है, “नहीं।” दुकान वाला पूछता है, “यह?” महिला कहती है, “नहीं, यह।” दुकान वाला सेब उठाकर देता है। महिला सेब देखती है। वह कहती है, “नहीं।” दुकान वाला हंसता है। वह कहता है, “यह?” महिला हाथ से दूध की थैली दिखाती है। वह कहती है, “हाँ।” दुकान वाला जूते उठाकर उसके पास रखता है। महिला जूते देखती है। वह कहती है, “नहीं, नहीं।” दुकान वाला हंसता है, पर रुकता है। वह जूते नीचे रखता है। वह महिला के हाथ को देखता है। फिर वह दूध की थैली उठाता है। वह धीरे कहता है, “दूध।” महिला उसकी ओर देखती है। वह कहती है, “दूत।” दुकान वाला कहता है, “फिर से, दूध।” महिला धीरे कहती है, “दूध।” दुकान वाला कहता है, “हाँ, दूध।” महिला थैली की ओर हाथ करती है। वह कहती है, “यह, कृपया।” दुकान वाला दूध की एक थैली देता है। महिला पूछती है, “कितना?” दुकान वाला कहता है, “एक रुपया।” महिला एक रुपया देती है। दुकान वाला पैसे देखता है। वह कहता है, “एक रुपया।” महिला कहती है, “हाँ।” दुकान वाला दूसरी दूध की थैली उठाता है। वह थैली महिला की छोटी थैली में रखता है। वह कहता है, “यह भी।” महिला कहती है, “नहीं।” दुकान वाला कहता है, “कोई बात नहीं।” वह दूसरी थैली रख देता है। महिला फिर कहती है, “धन्यवाद।” दुकान वाला कहता है, “हाँ।” महिला अपनी थैली लेती है। बाहर रात का समय है। बाजार में लोग घर जा रहे हैं। महिला धीरे चलती है। वह अपने हाथ में दूध देखती है। वह रास्ते में कहती है, “दूध।” फिर वह कहती है, “दूध।” उसके घर के पास वह रुकती है। महिला दरवाजा खोलती है। वह थैली मेज पर रखती है। वह फिर कहती है, “दूध।” सीढ़ियों के ऊपर पड़ोसी खड़ा है।