सीताक चायक दोकान आज सीता बजारमे चायक दोकान खोलैत अछि। आज घरक किराया देबाक दिन अछि। सीता नब केतली किनय चाहैत अछि। पुरान केतलीक नीचाँ छेद अछि। रामू दोकान लग आबि ठाढ़ होइत अछि। “सीता, हमर चाय तैयार अछि?” “अहाँक चायमे कम चीनी रहैत अछि।” “हँ, आ एकटा रोटी दिअ।” सीता चाय आ रोटी आगाँ रखैत अछि। रामू पैसा दैत अछि। “कतेक भेल?” “पाँच टाका भेल।” रामू पाँच टाका दैत अछि। सीता पैसा गिनैत अछि। कमला सेहो दोकान लग अबैत अछि। “सीता, हमर चायमे दूध नहि दिह।” “अहाँक चायमे दूध नहि रहैत अछि।” “दूटा बिस्कुट सेहो दिअ।” सीता कमलाक चाय बनबैत अछि। ओ दूटा बिस्कुट रखैत अछि। “कतेक भेल?” कमला पूछैत अछि। “चारि टाका भेल।” कमला चारि टाका दैत अछि। नन्दू धीरे-धीरे दोकान लग अबैत अछि। “सीता, हमर चायमे बेसी चीनी दिअ।” “अहाँक चायमे बेसी चीनी रहैत अछि।” “आधा कप चाय दिअ।” “आधा कप चाय आ एकटा रोटी?” “हँ, एकटा रोटी।” सीता आधा कप चाय आ रोटी दैत अछि। नन्दू पैसा खोजैत अछि। ओकरा लग दू टाका अछि। “सीता, आइ दू टाका अछि।” “रोटी आ चाय तीन टाका अछि।” “काल्हि एक टाका देब।” सीता नन्दूक दिस देखैत अछि। पुरान केतलीसँ पानी टपकैत अछि। “ठीक अछि,” सीता कहैत अछि। “काल्हि एक टाका दिअ।” नन्दू चुपचाप चाय पीबैत अछि। गोपाल आबि पूछैत अछि, “सीता, चाय अछि?” “अछि। अहाँक चायमे चीनी नहि रहैत अछि।” “आ एकटा सूखा रोटी दिअ।” गोपाल बैसि जाइत अछि। सीता चाय बनबैत अछि। ललन केतली लऽ कऽ बजारमे घुमैत अछि। ओ सीताक दोकान लग रुकैत अछि। “सीता, नब केतली लेब?” ललन पूछैत अछि। सीता पुरान केतली देखैत अछि। “कतेक टाका?” “दस टाका।” सीता अपन पैसा गिनैत अछि। ओकरा लग नौ टाका अछि। रामू अपन चाय रखैत अछि। “सीता, हम एक टाका आ देब।” कमला सेहो कहैत अछि, “हम सेहो एक टाका देब।” “नहि,” सीता कहैत अछि। “हम अपन पैसा देब।” नन्दू अपन जेबी देखैत अछि। “हमरा लग एक टाका अछि,” नन्दू कहैत अछि। सीता नन्दूक हाथ रोकैत अछि। “नहि, अहाँ काल्हि देब।” गोपाल चुपचाप एक टाका ललन लग रखैत अछि। “ई हमर टाका अछि,” गोपाल कहैत अछि। सीता सब दिस देखैत अछि। ललन कहैत अछि, “अब दस टाका भेल।” सीता पुरान केतली ललनकेँ दैत अछि। ओ नब केतली लैत अछि। “आइ चाय नब केतलीमे बनत,” सीता कहैत अछि। रामू कहैत अछि, “हमर चायमे कम चीनी राखू।” कमला कहैत अछि, “हमर चायमे दूध नहि राखू।” नन्दू कहैत अछि, “हमरा आधा कप दिअ।” सीता नब केतलीमे पानी भरैत अछि।