देर वाली ट्रेन आज जयपुर स्टेशन पर बहुत लोग हैं। आज रवि को घर जाना है। उसकी ट्रेन फिर देर से आती है। कमला सुबह से चाय बना रही है। उसकी छोटी दुकान प्लेटफार्म के पास है। रवि दुकान के पास आता है। कमला उसे देखती है। “चाय होगी?” रवि पूछता है। “होगी। चीनी कितनी?” कमला कहती है। “कम चीनी। पैसा कितना?” “एक कप दस रुपये का है।” रवि पैसा देता है। कमला चाय देती है। रवि बेंच पर बैठ जाता है। वह बार बार समय देखता है। “ट्रेन आई?” रवि पूछता है। “नहीं आई,” कमला कहती है। “आज भी देर है।” “आज भी?” “आज भी। आपकी ट्रेन हमेशा देर से आती है।” रवि चाय पीता है। सामने लोग आते जाते हैं। कोई घर जा रहा है। कोई काम से आया है। कोई अपने बच्चे के साथ बैठा है। प्लेटफार्म पर आवाज आती है। रवि तुरंत खड़ा होता है। “ट्रेन आई?” वह पूछता है। “नहीं। यह दूसरी आवाज है,” कमला कहती है। रवि फिर बैठ जाता है। उसकी चाय खत्म हो जाती है। “एक और चाय होगी?” रवि पूछता है। “होगी। इस बार पैसा बाद में देना,” कमला कहती है। “नहीं, पैसा अभी दूँगा।” “आप रोज पैसा अभी देते हैं।” “आप रोज चाय देती हैं।” कमला कप में चाय डालती है। वह कप रवि के सामने रखती है। “आज ट्रेन समय पर आएगी,” रवि कहता है। “आप यह बात हर दिन कहते हैं,” कमला कहती है। “आज सच में आएगी।” “तो आज आप जल्दी घर जाएँगे।” “हाँ। माँ इंतजार कर रही है।” रवि कप दोनों हाथों से पकड़ता है। कमला दूध की थैली उठाती है। उसकी दुकान में दूध कम है। चीनी भी कम है। वह सामने की दुकान की तरफ देखती है। वहाँ आज दुकान बंद है। “कमला, एक चाय और,” रवि कहता है। “आपकी ट्रेन की आवाज आई क्या?” “नहीं, मेरी चाय की आवाज आई है।” कमला हँसती नहीं। वह कप उठाती है। “पैसा है?” वह पूछती है। “है। लेकिन मेरी ट्रेन नहीं है।” कमला चाय बनाती है। इस बार वह कम दूध डालती है। रवि चाय देखता है। “आज चाय कम है,” वह कहता है। “आज दूध कम है,” कमला कहती है। “कल पैसा लाना।” “कल भी ट्रेन देर से आएगी।” “तो कल चाय भी मिलेगी।” फिर स्टेशन पर आवाज आती है। इस बार लोग खड़े होते हैं। रवि भी खड़ा होता है। कमला कप उसके हाथ में देती है। “ट्रेन आ गई,” रवि कहता है। “हाँ, आज आ गई,” कमला कहती है। रवि कप रख देता है। वह कमला को पैसे देता है। ट्रेन रुकती है। रवि दरवाजे के पास जाता है। फिर पीछे देखकर कहता है, “कल मिलते हैं।” कमला खाली कप धोती है। वह कहती है, “कल समय पर आना।”