आज की बस सुबह की बस वाली जगह पर आरव खड़ा है। आज मीरा बस नहीं ले रही है। आज उसका इस काम में अंतिम दिन है। मीरा पास आती है। उसके हाथ में एक छोटा बैग है। आरव उसे देखता है। मीरा कहती है, “आज आप पहले आए हैं।” आरव कहता है, “आज आप बस नहीं लेंगी?” “नहीं, आज नहीं।” “क्यों?” “आज मेरा काम यहाँ पूरा है।” “कल से?” “कल से मैं दूसरे काम पर जाऊँगी।” “वह काम कहाँ है?” “घर के पास है।” बस आती है। बस में लोग चढ़ते हैं। मीरा बस की ओर नहीं जाती। आरव भी नहीं जाता। आरव कहता है, “आपने मुझे पहले क्यों नहीं बताया?” मीरा कहती है, “आपने पूछा ही नहीं।” “मैंने कई बार पूछा।” “आपने बस का समय पूछा।” “आपका समय नहीं पूछ सकता था।” मीरा उसे देखती है। फिर वह नीचे देखती है। “अब पूछिए,” मीरा कहती है। आरव कुछ देर खड़ा रहता है। “क्या आप आज शाम मिलेंगी?” “नहीं।” “क्यों?” “घर में मेरी शादी की बात चल रही है।” आरव का हाथ बैग पर रुक जाता है। “आपकी शादी?” “अभी कुछ तय नहीं है।” “फिर आप मुझसे नहीं मिल सकतीं?” “अभी नहीं।” “कब?” “जब घर में बात होगी।” “किस बात की?” “आपकी बात की।” बस फिर आती है। इस बार भी मीरा बस में नहीं चढ़ती। आरव कहता है, “मैंने आपको कुछ नहीं बताया।” “आप रोज बताते हैं।” “क्या?” “आप मेरे लिए जगह रखते हैं।” आरव कुछ नहीं कहता। मीरा कहती है, “आप पानी लाते हैं।” “वह तो काम है।” “आप मेरी बस देखते हैं।” “वह भी काम है।” “आप मुझे देखते हैं।” आरव धीरे से कहता है, “मैं आपको पसंद करता हूँ।” मीरा की आँखें आरव पर रहती हैं। “मैं भी,” वह कहती है। आरव पूछता है, “फिर आज क्यों नहीं?” “घर में अभी बात नहीं हुई।” “मैं आपके पिता से बात करूँ?” “अभी नहीं।” “तो मैं क्या करूँ?” “मेरा नंबर याद कर लीजिए।” मीरा अपना नंबर बताती है। आरव नंबर दो बार बोलता है। मीरा कहती है, “अब आप अपना नंबर बताइए।” आरव अपना नंबर बताता है। मीरा नंबर दो बार बोलती है। तीसरी बस आती है। मीरा सड़क की ओर देखती है। “मैं कल यहाँ नहीं रहूँगी,” वह कहती है। “मैं कल भी यहाँ रहूँगा,” आरव कहता है। “बस लेने?” “आपका नंबर रखने।” मीरा बस की ओर जाती है। वह दरवाजे पर रुकती है। “आरव,” वह कहती है, “घर में बात होने तक रुकिए।” आरव कहता है, “मैं रुकूँगा।” मीरा बस में चढ़ जाती है। आरव उसका नंबर फिर बोलता है।