बजार सीता पटना शहरक छोट बाजारमे ठाढ़ अछि। ओ तीन सप्ताह पहिने शहरमे अबैत अछि। ओकर घरमे छोट रसोई अछि। आज राति पड़ोसिन खाय लेल अबैत अछि। बाजार बन्द होएबाक समय नजदीक अछि। ओकरा रोटी चाही, मुदा ओ शब्द नहि जनैत अछि। सीता एकटा दुकानक आगाँ रुकैत अछि। दुकानपर प्याज, नून, चाउर आ रोटी राखल अछि। सीता अंगुरीसँ एकटा वस्तु दिस देखबैत अछि। ओ धीरे कहैत अछि, “कृपया, ई।” हरि ओकरा एकटा प्याज दैत अछि। सीता प्याज लैत अछि। ओ प्याज दिस देखैत अछि। फेर हरि दिस देखैत अछि। “नहि,” सीता कहैत अछि। हरि पूछैत अछि, “ई नहि?” सीता कहैत अछि, “नहि।” ओ फेर अंगुरी करैत अछि। एहि बेर हरि ओकरा नूनक डिब्बा दैत अछि। डिब्बा छोट अछि। सीता डिब्बा देखैत अछि आ कहैत अछि, “नहि, ई।” हरि हँसैत अछि, मुदा जल्दी नहि करैत अछि। ओ पूछैत अछि, “ई?” सीता कहैत अछि, “नहि।” हरि एकटा चमच उठबैत अछि। ओ चमच सीताक हाथमे दैत अछि। सीता चमच देखैत अछि। हरि सेहो चमच देखैत अछि। दुनू किछु समय चुप रहैत अछि। हरि हाथ उठबैत अछि। “बस, बस,” ओ कहैत अछि। ओ दुकानक भीतर जाइत अछि। ओ रोटी उठबैत अछि। ओ रोटी सीताक सामने रखैत अछि। फेर ओ धीरे कहैत अछि, “रोटी।” सीता हरिक मुँह दिस देखैत अछि। ओ धीरे कहैत अछि, “रोटा।” हरि तुरन्त कहैत अछि, “रोटी।” ओकर आवाज नरम अछि। सीता फेर कहैत अछि, “रोटी।” एहि बेर शब्द ठीक होइत अछि। हरि कहैत अछि, “हँ, रोटी।” सीता पूछैत अछि, “कतेक?” हरि एकटा रोटी उठबैत अछि। ओ कहैत अछि, “एकटा पाँच टाका।” सीता अपन बैगसँ पैसा निकालैत अछि। ओ पाँच टाका हरिक हाथमे दैत अछि। “धन्यवाद,” सीता कहैत अछि। हरि रोटी बैगमे रखैत अछि। फेर ओ दोसर रोटी बैगमे रखैत अछि। सीता तुरन्त कहैत अछि, “नहि, एकटा।” हरि कहैत अछि, “ई सेहो।” ओ दोसर रोटी लेल पैसा नहि लैत अछि। सीता बैग पकड़ैत अछि। “धन्यवाद,” ओ फेर कहैत अछि। दुकान बन्द होइत अछि। सीता छोट बाटसँ घर दिस चलैत अछि। बैग हलुक अछि। ओ बाटमे धीरे कहैत अछि, “रोटी।” ओ शब्द फेर कहैत अछि। घरक सीढ़ी लगि ओ रुकैत अछि। दुआरि पर ओ कहैत अछि, “रोटी।” ऊपर पड़ोसिन ठाढ़ अछि।