बीस मिनट की दौड़ तेज़ बारिश में रफीक का रिक्शा स्टेशन के बाहर रुकता है। सड़क पर पानी भर चुका है, और आगे एयरपोर्ट की बस खड़ी है। मीरा पैसे देती है और कहती है, “बीस मिनट में प्रवेश बंद होगा।” रफीक सामने की सड़क देखकर कहता है, “बस तक धीरे जाना, पानी तेज है।” “धीरे जाने का समय नहीं है,” मीरा कहती है और दौड़ जाती है। बस चलती है, और रफीक पीछे की सीट पर एक पासपोर्ट देखता है। वह पासपोर्ट खोलता है और फोटो में मीरा का चेहरा पहचान लेता है। “अरे, यह तो उसी महिला का है,” वह कहता है। रफीक रिक्शा आगे करता है, लेकिन पानी उसके पैरों तक आता है। बस दूसरी सड़क पर जाती है, इसलिए वह भी उसी दिशा में मुड़ता है। आगे गाड़ियों की लंबी लाइन है। “रास्ता दो,” रफीक आवाज देता है, पर कोई गाड़ी नहीं चलती। वह रिक्शा सड़क के पास खड़ा करता है और पासपोर्ट सिर से ऊपर रखकर दौड़ता है। पानी में उसका पैर गलत जगह पड़ता है। वह सड़क पर हाथ रखकर खुद को रोकता है, और उसके हाथ में तेज दर्द होता है। पीछे उसका रिक्शा पानी के साथ धीरे चलने लगता है। रफीक एक पल उसे देखता है। फिर वह पासपोर्ट पकड़कर बस की ओर दौड़ता है। बस एयरपोर्ट के सामने रुकती है, लेकिन मीरा भीड़ में दिखाई नहीं देती। रफीक प्रवेश तक पहुँचता है, जहाँ एक अधिकारी उसे रोकता है। अधिकारी कहता है, “आप अंदर नहीं जा सकते।” रफीक पासपोर्ट दिखाकर कहता है, “एक महिला यह मेरे रिक्शे में छोड़ गई है।” “नाम क्या है?” अधिकारी पूछता है। रफीक पासपोर्ट देखकर कहता है, “मीरा कुमार।” अधिकारी अंदर आवाज देता है, “मीरा कुमार कौन है?” मीरा पीछे की लाइन से दौड़कर आती है। वह खाली हाथ आगे करती है और कहती है, “मेरा पासपोर्ट कहाँ है?” “यहाँ है,” रफीक कहता है, “अब इसे मत छोड़ना।” मीरा पासपोर्ट दोनों हाथों से पकड़ती है। “आपका हाथ देखो, खून निकल रहा है।” रफीक अपना दर्द वाला हाथ पीछे करता है। मीरा पैसे निकालती है, लेकिन वह सिर हिलाता है। “मेरा रिक्शा पानी में अकेला है,” वह कहता है। रफीक मुड़ता है और बारिश में अपने रिक्शे की ओर दौड़ जाता है।